होली
होली
वासंती नव सस्येष्टी मिल ,
हम सब आओ मनाएं ।
नये अन्न का बना के होला ,
प्रभु को भेट चढाएं ।।
दिया आपने मेहनत का फल,
तेरा ही तुमको अर्पण।
दास तुम्हारा चरणो मे तव ,
करता हूं मै समर्पण।।
चेहरे का रंग किसी का तुम ,
बन कारण नही उडाना ।।
लाज शर्म को रखना वाकी ,
खुद को नही लजाना ।।
नही हमारे धन तन बैभव ,
से हो अहित किसी का ।
मिले मिटाकर बैर गले हो ,
हमसे हित ही सभी का ।।
प्रेम और सौहार्द हमारा ना,
बिगडे यह रखना ध्यान ।
सद्गुण के पालक बन जगको ,
दे जाएं हम नव पहचान।।
होली मेल खुशी का उत्सव ,
मिलकर सभी मनाओ ।
पी मदिरा मदमत्त बनो मत ,
ना कटु बचन सुनाओ ।।
रंग लगाएं बांटे खुशियां ,
सबका मुंह मीठा करवाएं ।
भाई चारा प्रेम सहित मिल,
होली का त्योहार मनाएं ।।
