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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

"होली के रंग अनेक"

"होली के रंग अनेक"

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होली के रंग है,अनेक

पर गर मित्र न हो एक

व्यर्थ है,ये रंग अनेक

मित्र बना,मजे देख


खेलो-खिलाओ रंग

जिंदगी बनेगी नेक

अधूरे है,सब ही रंग

जब न हो,मित्र संग


पत्थर पर खींचे,रेख

गर प्रयत्न हो,अनेक

वही देते है,घुटने टेक

जो खो देते,स्व विवेक 


होली के रंग है,अनेक

जो मिटाते दुःख-क्लेश

कुदरती रंग,करते,सचेत

छोड़ो कृत्रिमता का रेत


बसाओ प्राकृतिक खेत

जिंदगी लिखोगे,सुलेख

वो छिपाते छद्मता पेट

जो लगाते,चेहरे अनेक


होली के रंग है,अनेक

वो करे सच्चे रंग से भेंट

जिसका दिल,साखी नेक

छोड़ दो चलना चाल,भेड़


खेलों इन कुदरती रंगों से,

मन,त्वचा के लिए है,नेक

छोड़ दो,ये छद्म रंग,फेंक

चमकोगे,स्वर्णिम से,तेज


होली के रंगों सा खिले

सबके जीवन का खेत

सबको हो बधाई,अनेक

सबकी मिटे,दुःख-रेख।


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