हमसफ़र
हमसफ़र
एक दिया काफी है, शमा के लिए
लौ की गरमाईश से रूहानियत के लिए
मुद्दत से तुम हमारे हो हमराज़
मुख्तलिफ कैसे हो जाए आज
हाथों मे हाथ लिए, इस पर हमे है नाज़
चढाव देखे बहुतेरे ऊपर नीचे
साथ मिलकर बहुत से बीज है सींचे
बाग है हरा भरा और मुस्काते है हम
राहों के कांटे अब नहीं याद करते हम
इस मोड़ पर भी खड़े हैं डटकर हम
आपको ही है आगे चलना पीछे हैं हम
कांटो का डर तब से नहीं है
जब से आपके कांधे पर मेरा सर है
जब से आपके कांधे पर मेरा सर है ...,

