शिक्षक
शिक्षक
अभी भी शिक्षक है यहाँ
ईमानदारी उन्हीं से है जहान
द्रोणाचार्य की मिसाल से कहीं ऊपर
तराश रहे एकल्वयो को ढूंढ ढूंढ कर
संदीपनी आश्रम तो अभी भी यहाँ
कृष्ण तो स्वनिर्मित आश्रम तो जहाँ तहाँ
एकल्वयो की प्रधानता है आज
ज्ञान का भंडार यहाँ
नहीं द्रोण का मोहताज
एकल्वय आज है सरताज
शिक्षक और सिक्कों का नहीं कोई नाता
ज्ञान दाता है सुदामा से उसका नाता
खुले बाजार जो शिक्षा दिखती
वो शिक्षा नहीं दोस्तों तिजारत है दिखती
शिक्षक बेबस कभी न था
अपनी व्यथा का उसे कभी गम न था
जहाँ शारदा का वास हो
लक्ष्मी चंचला का कैसे ठहराव हो
सच्चरित्र जो आज है नज़र आता
वो महान शिक्षकों का समर्पण है याद आता
राष्ट्रोन्नति का एक पायदान है शिक्षक
हमारी तुम्हारी एक एक अच्छाई है शिक्षक
बड़े से बड़े शख्सियत की बुनियाद है शिक्षक
स्वयं जल जाता है वो एक दिये की तरह
अनेकों जीवन रौशन करते हुए, हमेशा मुस्कुराता है शिक्षक।
