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Abhishu sharma

Fantasy Inspirational

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Abhishu sharma

Fantasy Inspirational

हमदर्द

हमदर्द

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ओ मेरे दर्द बेदर्दी ! देख मेरे भी हैं हमदर्दी,

 यह गर्दिश में चाँद मेरा गर्दी ,

 हिमायती मेरे सारे के सारे, ये तारे -सितारे,

मेरी हंसी, मेरी मुस्कराहट के ये रक्षक,

देखो मेरे भक्षक ये मेरे अंगारे !,

दुआओं से इनकी, मेरे हेमंत की ये वर्दी

कुदरत के मखमली पालने में मुझे पाला -पोसा

फेंका-कुचला, तेरे दिए ऐसे थपेड़ों पर मलहम यह बोसा 

मैं स्वयं स्वरूप प्रभाकर का,

प्रभाव तेरा, तेरे अभिशाप,

देखकर मेरे जाप की आग,

सूरज का ताप समेटे अंदर, 

जला कर राख किया, बहाई अस्थियां समंदर 

तेरे मानस पटल पर ये डोलते सांप अभागे,

सब संताप के बीज पनपते ये पाप बीचोबीच इधर उधर भागे 

अब जब सुकून की चाहत में, अमन के चमन की त्रास में

यह लजाती -लहराती शीतल बयार, मेरे बचपन की सहचर, मेरी यार 

बांधती मेरे जीवन को सुख -चैन से यह प्रीत की डोरी,

 सुनाती थी जब माँ लेकर गोद में यह लोरी 



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