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सुरशक्ति गुप्ता

Abstract

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सुरशक्ति गुप्ता

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हमारी माएं

हमारी माएं

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हमारी माएं भी कितनी अनपढ़ है,


हम खाने के लिए एक रोटी मांगते हैं


तो वो दो दे देती है।


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