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SNEHA NALAWADE

Abstract

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SNEHA NALAWADE

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हम

हम

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दिल लगी बहुत

भयानक होती है

कब वक्त के साथ हम

किसी के करिब आ जाते हैं


पता ही नहीं चलता

कौन हमारे करीब

आ जाता है उसका भी

पता नहीं चलता


उससे बात किए बगैर दिन की

शुरुआत ही नहीं होती

कुछ भी तो रह गया है आसा

लगने लगता है वक्त के साथ साथ

कब इतने करिब आजाते है क्या पता


उसका एहसास हर पल होने लगता है

सामने न होते हुए भी

सामने नजर आने लगता है

क्या यही प्यार है ?


क्या यही दिल लगी है ?

बहुत कम ऐसा एहसास

होता है किसी के लिए


पर सबसे भयंकर

एहसास होता है किसी को

खोने का डर

रिश्तों को समझो अपने

ताकी वह किसी अपने का ना खोए हम।


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