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Surendra kumar singh

Abstract

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Surendra kumar singh

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हम सभी जानते हैं

हम सभी जानते हैं

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हम सभी जानते हैं

सकारात्मकता में अविश्वास से

उदासी का जन्म होता है

ये फलती फूलती है

और जीवन बोझिल हो जाता है।

मनुष्य बेचैन हो उठता है

ओर संशय में डूब जाता है।

फिर भी हम

अविश्वास के सुर में

सुर मिलाते रहते हैं

उसकी प्रशस्ति के गीत

गुनगुनाते रहते हैं

और उसे शक्ति प्रदान 

करते रहते हैं

जैसा कि आजकल है।

फिर भी

जब यह सब अपनी पराकाष्ठा पर

होता है

तब भी न

विश्वास की एक झलक

विचारों के धरातल पर ही सही

पूरा परिदृश्य बदल देती है।


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