हम हार नहीं सकते
हम हार नहीं सकते
जब तक रगों में
है स्वदेश प्रेम,
नारी में लक्ष्मी
नर में भगतसिंह रमते।
उम्मीदों में है
हौसलों का ज़ज्बा,
तब तक हम
हार नहीं सकते।
दृढ़ निश्चय रखते सदा,
करते ना निषेधात्मक होड़।
राष्ट्रहित में हँसकर
गले लगाते मौत,
आघाती को
प्रतिघात बगैर
कभी देते नहीं छोड़।
रखते शुद्ध विचार सदा,
द्वंद्व ना कभी रचते।
जब तक रगों में
है स्वदेश प्रेम...।
निज मेहनत के बल पर,
आज विश्व पटल पर
है चमके।
करते सीने पर वार सदा,
हम पीठ कभी
नहीं तकते।
हो मुल्क का
नाम शिखर पर,
काम सदा ऐसा करते।
जब तक रगों में
है स्वदेश प्रेम.....।
