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Sammeer Gupta

Abstract

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Sammeer Gupta

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हम गुज़र जाते हैं

हम गुज़र जाते हैं

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कहते हैं वो की वक़्त गुज़र जाता है

सोचता हूँ मैं की कहाँ गुज़रता है वक़्त 


ये तो बस हम हैं जो गुज़र जाते हैं 

ज़िंदगी की पेंचीदा, हसीन गलियों से 


दिल में कुछ पाने कुछ आने की आस लिए 

जेब में उम्मीदों की धूप,

चंद सिक्के और कुछ गुमान लिए !


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