हजारों मील की दूरी
हजारों मील की दूरी
एक ही छत के नीचे हैं
पर दिल कोसों दूर हैं
ये रिश्ता ढ़ोने के लिए
जैसे दोनों ही मजबूर हैं
तुम्हारी दुनिया अलग है
मेरा भी जहां कुछ और
बस दिखावे का है नाता
दिलों में है ना कोई ठौर
ना तुम मुझे पसंद हो
ना मैं तुम्हारे दिल में हूं
तुम भी खुश नहीं हो ऐसे
मैं भी बड़ी मुश्किल में हूं
वादा तुमने भी किया मैंने भी
पर निभा ना पाए हम कभी
अपनी ही दुनिया में खोकर
हम तुम बन गये अजनबी
काश कि तुम समझ पाती
मेरे दिल के जजबातों को
मैं भी कभी जान न सका
तुम्हारे विकट हालातों को
ये जो हजारों मीलों की दूरी
तेरे मेरे दरमियान बन गई
साथ साथ रहते रहते भी
इतनी बड़ी खाई क्यों बन गई
अभी भी कुछ बिगड़ा नहीं
फासले अब भी मिट सकते हैं
दो कदम तुम चलकर आओ
दो कदम हम भी चलते हैं।

