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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Tragedy Inspirational

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Tragedy Inspirational

हिंदुस्तान की जय हो

हिंदुस्तान की जय हो

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हिंदुस्तान की जय हो,

 हिंदुस्तान की जय हो।

हर कण जिससे हो 

इसकी पहिचान की जय हो।।


जय हो सोंधी-सोंधी  

खुशबू वाली माटी की।

जय हो इसके उर में 

पलती हर परिपाटी की।।


अन्न उगाते उदर विधाता 

किसान की जय हो.....

तीन रंग के झंडे जी 

की होवे जय जयकार।


मेरे देश के लोकतंत्र से 

हो दुनिया को प्यार।।

मंत्र एकता का देते 

उस संविधान की जय हो.....


देख के पलटन  

मेरे देश की दुश्मन थर्राये।

शौर्य वीरता उन वीरो की 

मेरे राष्ट्र की अंबर भी गाये।।


भारत माँ के रक्षक 

वीर जवान की जय हो......

विश्व गुरु का ताज  

पहनकर हम हैं इतराते।


जग में शांति-अहिंसा का ,

संदेशा बिखराते वो वीर।।

हो वसुधैव कुटुंबकम, 

 जिसकी शान की जय हो....


वीरों के बलिदानों पर

 हम पुष्प चढ़ाते हैं।

सहादतों की गौरव-गाथा

वो मिलकर सब गाते हैं।।


आजादी मे जो देश के

लिए शहीद हुए 

उन सभी वीरों के,

जो बलिदान की जय हो.....


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