STORYMIRROR

हरीश सेठी 'झिलमिल'

Children

4  

हरीश सेठी 'झिलमिल'

Children

हिंदी

हिंदी

1 min
386

हिंदी है भारत की पहचान

देश की आन बान औ' शान


तुलसी,कबीर,मीरा की जान

साहित्य में निराला,रसखान


इसमें है कला और विज्ञान

अलंकार,रस औ' छंद विधान


बनी अंतरजाल की भाषा

हृदय इसका बहुत विशाल


भूत,वर्तमान और भविष्य

तीन इसमें हैं सुंदर काल


मानक स्वरूप है स्वीकारा

शिरोरेखा का अजब नजारा


विराम चिह्न लगते हैं प्यारे

अनुस्वार,अनुनासिक हैं न्यारे


पंचम वर्ण का अलग इतिहास

अब होता है सही आभास


बहुत सुंदर है हिंदी भाषा

भारत की है ये राजभाषा


जन-जन की है ये अभिलाषा

हिंदी बन जाए राष्ट्रभाषा।


Rate this content
Log in

More hindi poem from हरीश सेठी 'झिलमिल'

Similar hindi poem from Children