हाँ, परेशाँ हूँ मैं
हाँ, परेशाँ हूँ मैं
हाँ, मैं कुछ परेशाँ हूँ
कुछ उदास हूँ
हाँ, तन्हा भी हूँ
थक गयी हूँ शायद
दौड़ दौड़ कर
हाँ, मेरी आँखों में
शायद कुछ पानी सा है
पर जब तुम आते हो
पास मेरे
मैं फेर लेती हूँ नजरें !
तुम भी बस पल दो पल
ठिठक कर
चले जाते हो
समझ नहीं पाते
समझ नहीं पाते कि
मुझे तुम्हारी आँखों में
दया नहीं
विश्वाश चाहिये
कि मैं थकी हुई हूँ
पर दौडूंगी
थोड़ा रुक कर
तुम्हारी निगाहों में मुझे
मेरे जीतने की
आस चाहिए
हाँ उदास हूँ मैं पर
दुखी न हो तुम
मेरे दुःख से
मुझे तुमसे फिर से
वही मुस्कान चाहिए
साथ में दौड़ो
या न दौड़ो
पर राह में यूं ही
मुस्कुरा कर मिलना
बस इतना
योगदान चाहिए।
