गुरु वचन।
गुरु वचन।
कठिन नहीं मनुष्य जन्म पाना।
बड़ा ही कठिन है मनुष्य हो जाना।।
श्रेष्ठ योनि मानव की तब जानो।
ईश्वर अंश सब जीवो में तब मानो।।
दरिद्रता समान बड़ा दु:ख न दूजा।
प्रभु दर्शन निष्काम भाव से कर पूजा।।
सबसे बड़ा सुख संत मिलन से होता।
बिन संतन सकल जगत है रोता।।
सहज स्वभाव, परोपकार गुण हैं रमते।
गुरु को ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश सम कहते।।
अहिंसा परमो धर्मः महान पुण्य कहलाता।
सत संगत बिन मल विकार न जाता।।
परनिंदा सम भारी पाप न कोई।
निंदा सुने सो स्वतः निर्मल वो होई।।
मानसिक रोग काम-क्रोध से जनमता।
बिन सत्संग भव-रोग न कटता।।
अगर चाहते ईश्वर दर्शन को पाना।
"नीरज" गुरु वचनों को हृदय तू लगाना।।
