गुलाल
गुलाल
देखो मेरी अंजलि को
कैसे सजाए हैं ,
रंग बिरंगे शुभ फाग से ।
सुनो आवाज दिल की
कैसे बुला रहे हैं तुम्हें
स्नेह और अनुराग से ।
तुम्हारे इंतज़ार में सनम
हर लम्हें बेकरार हैं ,
आओ रंग दूं तुम्हे गुलाल से ।
सारी नशा उतार दूं सनम
चूम के होंठों को तुम्हारी
मेरे रसना की गुलाल से ।
तन्हा दिल उतर आया है
मेरी हथेली में, सजकर
सतरंगी गुलालों से ।
हरदम तन्हाई में जीता हूं,
तरसते हमारी
प्रीत मिलन की खयालों से ।
नयना तरसे ,आंसू पीते
जुदाई में बरसों बीते
लौट आजा परदेशिया ।
तेरे प्रेम की विरह ज्वाला में
जल जल के दिन रात
देखना मैंने कैसे जिया पिया ।
हरे हैं सारे छाले ज़ख्म
काम न आते कोई मरहम
अब और सहे न जाते ।
तुमसे जो लिपट जाता
कस के सनम सीने में ,
सब छाले ज़ख्म मिट जाते ।
आके मल दो गूलालों को
तुम्हारे कोमल हस्तों से
मेरे अंग अंग में ।
जीवन में रंग भर जायेगा
हर दिन प्रीत का होली होगा,
सनम तेरे संग में ।
