STORYMIRROR

sargam Bhatt

Abstract

2  

sargam Bhatt

Abstract

गुलाबी होंठ

गुलाबी होंठ

1 min
160

होंठ चमक कर गुलाबी बन गए,

मेरी याद में वो शराबी बन गए।


सोच रहे थे मैं उनकी किस्मत में हूं,

किस्मत पर इतराते वो नवाबी बन गए।


जब पता चला मिलने से पहले बिछड़ जाऊंगी,

मुझको मनाने में वो हाजिर जवाबी बन गए।


उन्हें पता लगा मैं नॉन वेजिटेरियन हूं,

मेरी खिदमत में वो कबाबी बन गए।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract