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Namita Meshram

Romance

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Namita Meshram

Romance

गुज़ारिश

गुज़ारिश

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जिस्म से परे तुझे चाहूं 

मेरी रूह तक तेरा ही वजूद है


मेरी रिवायत में तेरा ज़िक्र

बेशुमार सा शामिल है


अजल तक मशहूर  

ईश्क का बड़ा चर्चा है


इस कैद में मज़ा भी 

और अज़ाब कातिलाना है


जुदा होकर भी तुझसे

जुड़ा जुड़ा सा है


सब डूब गया शायद

बाकी तेरा नाम ही है


ऐ मेरे हमनवा

बस एक ख्वाहिश दिल में है

 

मेरी कब्र तक आना

एक मुठ्ठी मिट्टी की गुज़ारिश है।



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