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ASTRO Vivekdutta

Romance

4  

ASTRO Vivekdutta

Romance

फिर तुम आ जाओ ना

फिर तुम आ जाओ ना

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जाने क्या बात हुई

जाने क्यों एक दिन 

तुम अचानक चले गये

मैं ने तो कभी कल्पना भी नही‌ की थी

कि ‌कभी‌ कोई दिन ऐसा भी होगा

जब तुम केवल स्मृतियों मात्र तक

सिमट जाओगे।

फिर से‌ तुम्हारी एक आवाज के लिये

कान तरसते है।

आंखे तुम्हारी बस एक‌ झलक को तरसती है।

क्यो चले गये इतनी दूर

आ जाओ ना

फिर से एक बार।

फिर तुम आ जाओ ना एक बार।


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