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Sasmita Patanaik

Romance Fantasy

4.6  

Sasmita Patanaik

Romance Fantasy

गुफ़्तगू

गुफ़्तगू

1 min
290


तन्हाई से घबराती थीअभी खुशिओं से

नज़रें चुराना चाहती हूं

खामोशी से मोहब्बत करती थी

पर अब किसीसे गुफ़्तगू करना चाहती हूं।

इस शहर की भीड़ में

कहीं खो जाना चाहती हूं

बेपरवाह होके खुली सांसे लेना चाहती हूं

आज किसी से गुफ़्तगू करना चाहती हूं।


दफन सारे एहसास को मेहसूस करना चाहती हूं

उलझे यादों को सबारना चाहती हूं

उन लम्हो को फिर से जोड़ना चाहती हूं

अब किसीसे गुफ़्तगू करना चाहती हूं।


दर्द को अब महबूबा बनाना चाहती हूं

हर ज़ख्म को प्यार करना चाहती हूं

पल भर के लिए ही सही

अब किसीसे गुफ़्तगू करना चाहती हूं।


तड़पती दिल को करार देना चाहती हूं

दरिया हूं समंदर में मिलना चाहती हूं

प्यार की गहराई को समझना चाहती हूं

आज किसीसे गुफ़्तगू करना चाहती हूं।


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