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Sneh Lata

Romance

4  

Sneh Lata

Romance

गंगा में हो जाती हूं

गंगा में हो जाती हूं

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स्पर्श तुम्हारा पा कर में यूं गंगा हो जाती हूं

जब छूते हो तुम शिव बनके तो स्वयं मोक्षप्रदायिनी हो कर भी भवसागर से मैं तर जाती हूं  


जब करते हो तुम जटा जूट में धारण वैग अपारा होके भी शीतल में हो जाती हूं तब में गंगोत्री में तेरी जटाओं से निकली त्रिवेणी में तीर्थराज का संगम में कहलाती हूं 


तुम अलख अगोचर शिव की भांति मैं जग तारन कहलाती हूं में स्वयं पाप नाशिनी होके भी तुम्हारे स्पर्श से मुक्ति पाति हूं 


में कावेरी अलकनंदा गोदावरी प्रत्येक रूप में महेश्वर तुझको समर्पित मैं हो जाती हूं में उज्जैन में शिप्रा हो कर प्रयाग में विश्वनाथ की गंगा का स्वरूप धराती हूँ 


स्पर्श तुम्हारा पा कर में यूं गंगा हो जाती हूं जब छूते हो तुम शिव बनके तो स्वयं मोक्षप्रदायिनी हो कर भी भवसागर से मैं तर जाती हूं।


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