पिता ज्ञान का सार है
पिता ज्ञान का सार है
पिता ज्ञान का सार है, माता ग्रंथों का विस्तार है।
ज्ञान अतुलनीय है उनमें, वो परब्रह्म जैसे जानकार है।
माता ग्रहणी हो के भी सरस्वती का अवतार हैं,
जिसमें है समझ हर भाषा को समझने की, वो तो वेदों का सार है।
गुरुकुल की शिक्षा प्राणाली से पूर्व, माता पिता ही सर्व प्रथम गुरु का अवतार है।
है अनुभव उनमें अधिक, वो तो ज्ञान का भंडार है।
शब्द कोष में शब्द अर्थ है, जो वो उन अर्थों का सार है।
गुरु से पूर्व जिससे हो ज्ञान की अर्जित, वो सानिध्य माता पिता का प्यार है।
अत्यंत ज्ञानी है वो व्यक्ति जिसमें उनसे प्राप्त ज्ञान का भंडार है।
पिता ज्ञान का सार है, माता ग्रंथों का विस्तार है।
