महेश्वर में मुक्ति पाना चाहती हूं 🌼❤️
महेश्वर में मुक्ति पाना चाहती हूं 🌼❤️
तुम्हारे चरण छू के मैं तर जाना चाहती हूँ तुम शिव का वो स्वरूप हो जिसके चरणों से लग कर मैं मुक्ति पाना चाहती हूँ
मैं अल्हड़ नदी की धारा सी तुम्हारे प्रेम के सागर में मिलकर में अपनी पूर्णता को पाना चाहती हूं जो संभव हो संगम तेरा मेरा तो तेरे अलिंगन से मैं मुक्ति पाना चाहती हूँ
तुम तो शिव का स्वरूप हो तुम साक्षात महेश्वर का रूप हो मैं प्रेम की अनुयायी बन तुम्हारे प्रेम में वैराग्य को अपनाना चाहती हूं प्रतीक्षा है तुम आओगे अपने हृदय से भी मुझे लगाओगे मैं पार्वती सी तपस्यारत हो तुम्हें शिव रूप में पाना चाहती हूं और यदा कदा तुम ना मिले तो भी तुम्हारी भक्ति कर में मुक्ति पाना चाहती हूं
तुम श्रृंगार मेरे वैराग्य का तुम्हारे सिवा कहाँ फिर मैं ये संसार चाहती हूँ तुम रहते हो पुष्पों के सुवास में उन पुष्पों से मैं अपने केशों का श्रृंगार चाहती हूं हर दिन तुमसे है शम्भू फिर भी मैं सोमवार को मुक्ति पाना चाहती हूँ
मणिकर्णिका के घाट पर खाक हो जाना चाहती हूं जो सम्मलित हो तेरी भस्म आरती में वो राख हो जाना चाहती हूँ जो छू लो तुम त्रिवेणी का संगम बनके तो मैं मोक्ष को पाना चाहती हूं
तुम्हारे चरण छू के मैं तर जाना चाहती हूँ तुम शिव का वो स्वरूप हो जिसके चरणों से लग कर मैं मुक्ति पाना चाहती हूँ
Written by
Snehlata
