STORYMIRROR

आशका शुकल "टीनी"

Drama

3  

आशका शुकल "टीनी"

Drama

ग़म - ए - दर्द

ग़म - ए - दर्द

1 min
190

ग़म - ए - दर्द की यह बात,

जुबां से हम बयां किससे करें।


लाखों अजनबी है यहां मगर,

अपना समझ कर मुलाकात किससे करें।


फितरत नहीं मेरी की हर बार,

सुनाउं उसे मैं हाल-ए-दिल ।


वो सुनते ही नहीं मेरी कोई बात,

तो हम फरियाद किससे करें।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama