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Deepak Goyal

Tragedy

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Deepak Goyal

Tragedy

ग़ज़ल

ग़ज़ल

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रो पड़ी ज़िंदगी फिर संवरते हुए

मुस्कुराने लगा था मैं मरते हुए


इश्क़ के रास्ते जाते जन्नत तलक

जाते हैं नर्क से पर गुजरते हुए


फिर न मुकरेंगे वादे से हम आदतन

उसने वादा किया फिर मुकरते हुए


फिर किसी पे न पत्थर चलाए गए

हम ने देखा जो ख़ुद को बिखरते हुए


शक्ल झूठी थी जब तक मेरे साथ था

अस्ल दिखलाई दिल से उतरते हुए.



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