गजल -पैगामे मोहब्बत
गजल -पैगामे मोहब्बत
हिन्द के दुश्मन आतंकी सब हमारे खौफ से ही मर जाएंगे
सुनो पाक सम्हालो अपनी आवाम भूख से ही मर जाएंगे
हम है शांति अमन के दूत विश्व शांति की चाह रखते है
नानक बुद्ध महाबीर का देश मगर न समझो डर जायेंगे
गर हो अमन चैन भारत मे क्यो कलेजा फटता है तेरा
फिक्र करो अपनी हम गुलश्ने चमन खुद ही सवर जाएंगे
प्यार का बदला प्यार से और जान भी दे सकते है हम
दिखाई आँख मगर तूने हमे हम हर हद से गुजर जाएंगे
क्यो पाल रखा है तूने खूनी दरिंदे अपनी माँदों मे बोलो
तेरे पाले भेड़िये उजाड़ देंगे घर तेरा टुकड़े बिखर जाएंगे
देख हमारी चकाचौंध हैरान न हो तरक्की के सितारो को
अब भी वक्त है सम्हल जा नामो निशान न नजर आएंगे
पैगामे मोहब्बत लेकर निकला है जहाँ सूरज भारत का
फैला मोहब्बत की रौशनी तेरे लोग बिना धूप मर जाएंगे
बेदखल हो चुका है तू सारी दुनिया से इंसानियत के नाम
दुतकारेंगे धिक्कारेंगे तेरे लोग दुनीया जब भी जिधर जाए.
