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Arvind Kumar Srivastava

Abstract

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Arvind Kumar Srivastava

Abstract

घूमते रहे

घूमते रहे

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घूमते रहे ये जहाँ

हम साथ होंगे सदा

[मुखड़ा]


संगीत के सुरों में झूमेंगे

खुशियों की लहरें उमड़ेंगी

हम साथ में होकर घूमेंगे

सुनहरी धूप से नहा कर

पलकों पर छाए हुए सपनों को

हकीकत में बदलना होगा


साथ में हाथ मिला कर

सफ़र को संवारना होगा

संगीत के सुरों में झूमेंगे

खुशियों की लहरें उमड़ेंगी


हम साथ में होकर घूमेंगे

सुनहरी धूप से नहा कर

नज़रों में सपनों की प्रतिमा

कल्पना से भी खूबसूरत


मंज़िलों की ओर बढ़ते चलें

जाने कितनी मुश्किलें होंगी आगे

संगीत के सुरों में झूमेंगे

खुशियों की लहरें उमड़ेंगी


हम साथ में होकर घूमेंगे

सुनहरी धूप से नहा कर

हम साथ में होकर घूमेंगे

सुनहरी धूप से नहा कर।


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