घृणा पे कविता
घृणा पे कविता
घृणा से भरे इस समय में,
चलिए मिलकर प्यार का पौधा लगाते हैं।
मनुष्य तो स्थिर रूप से प्यार करना सिखाते हैं,
नफरत के बीज को जड़ से मिटाते हैं,
लोगो को दूसरे के आत्मसम्मान की रक्षा करना सिखाते हैं,
बहनो की इज़्ज़त पे हाथ डालने वालों तो सबक सिखाते हैं,
भूखे बच्चों को दो रोटी खिलाते हैं,
असहाय लोगों की तरफ मदद का हाथ बढ़ाते हैं,
गद्दारों को सबक सिखाते हैं,
देश पे बुरी नज़र रखने वालों को उनकी जगह दिखाते हैं,
धर्म - जाति के नाम पे लड़ने वालों को सही रास्ता दिखाते हैं,
हिन्दू मुस्लिम न बनकर लोगों को इंसान बनना सिखाते हैं।
घृणा से भरे इस समय में,
चलिए मिलकर प्यार का पौधा लगाते हैं।
