अमीर हमज़ा
Drama
चलो अब
मोहब्बत की बात करते हैं
अमन, चैन व हिफ़ाजत
की बात करते हैं...!
शादी के बाद
(मुज़फ़्फ़रपुर ब...
ग़ज़ल
हास्य रस
शेर
धूप से रचेगा मंच धूप से रचेगा मंच
सारा कसूर हमारा था हमने ही तो हद से ज़्यादा इश्क़ किया था। सारा कसूर हमारा था हमने ही तो हद से ज़्यादा इश्क़ किया था।
खुश रहने और खुश रखने की जिम्मेदारी जो मेरी है। खुश रहने और खुश रखने की जिम्मेदारी जो मेरी है।
फासलों का ख्याल है जिन्हें, उनमें ही दूरियाँ बढ़ती जा रही है। फासलों का ख्याल है जिन्हें, उनमें ही दूरियाँ बढ़ती जा रही है।
लगा रहा था मरहम रिसते घावों पर आज पीड़ा कुछ कम थी। लगा रहा था मरहम रिसते घावों पर आज पीड़ा कुछ कम थी।
मानव की मानवीयता का प्रतिहारी हूँ मैं, हाँ साँवरी हूँ मैं। मानव की मानवीयता का प्रतिहारी हूँ मैं, हाँ साँवरी हूँ मैं।
पावस की घोर घटा देख सब नाच उठे, अधरों पर बैठी मुस्कान अब जागी है। पावस की घोर घटा देख सब नाच उठे, अधरों पर बैठी मुस्कान अब जागी है।
मुझको मेरी मांँ मेरी मांँ मांँ मेरी मांँ दे दो। मुझको मेरी मांँ मेरी मांँ मांँ मेरी मांँ दे दो।
हम हारे 'चौकीदार' की 'लहरों' में, तुम भी हुई उसमें फेल प्रिये... हम हारे 'चौकीदार' की 'लहरों' में, तुम भी हुई उसमें फेल प्रिये...
क्योंकि मैं तेरी माँ हूँ, आखिर मैंने ही तो संवारा है तुझे। क्योंकि मैं तेरी माँ हूँ, आखिर मैंने ही तो संवारा है तुझे।
बेखौफ होकर निडरता से जिंदगी बसर करना क्या इतना कठिन है औरत को औरत समझना। बेखौफ होकर निडरता से जिंदगी बसर करना क्या इतना कठिन है औरत को औरत समझना।
सब शांत, सब मौन और एकांत खोजता जीवन। सब शांत, सब मौन और एकांत खोजता जीवन।
तुम्हारा स्नेह ही तो मेरी संजीवनी माँ तुम हो तभी मैं हूँ। तुम्हारा स्नेह ही तो मेरी संजीवनी माँ तुम हो तभी मैं हूँ।
तोड़ तटबंध यादों का तूफान उमड़ा चांद मेरा बड़ा बैरी निकला। तोड़ तटबंध यादों का तूफान उमड़ा चांद मेरा बड़ा बैरी निकला।
मैं कहता हूं ख़्याल रख अपना इस बात को हमेशा टालती है। मैं कहता हूं ख़्याल रख अपना इस बात को हमेशा टालती है।
ए दोस्त, तेरा नाम उस दिन हर पन्ने पर सुनहरे अक्षरों में कुरेदा जाएगा। ए दोस्त, तेरा नाम उस दिन हर पन्ने पर सुनहरे अक्षरों में कुरेदा जाएगा।
तू जो है साथ तो ये सांसें चल रहीं हैं, तू ना होगा तो ये सांसें थम जाएंगी... तू जो है साथ तो ये सांसें चल रहीं हैं, तू ना होगा तो ये सांसें थम जाएंगी...
शांत वातावरण, बारिश की आवाज़; आहिस्ता चलती ठंडी हवा और सिर्फ तुम, पन्ने और कलम... शांत वातावरण, बारिश की आवाज़; आहिस्ता चलती ठंडी हवा और सिर्फ तुम, पन्ने और कलम.....
ये माता की नहीं पिता की बेटियाँ होती हैं। ये माता की नहीं पिता की बेटियाँ होती हैं।
वह सदी बदल देती या स्वयं बदल जाती या जीते जी मर जाती। वह सदी बदल देती या स्वयं बदल जाती या जीते जी मर जाती।