Shubham jadav
Tragedy
हमें तड़पा के हमें सहला क़े
खुद निकल गए।
प्यार क्या था वो बता गए
दिल तोड़ कर
दिल को सीलना सीखा गए।
खुद को अच्छा
और हमें बेवड़ा
बना गए।
फिर पूछते हैं
क्यों बदल गए।
ज़िन्दगी शुभम ...
गए तो वापस क्...
जरा मुड़ के तो...
प्यार नहीं तो...
दर्दे दिल
हर बार निराशा होती थी हर बार सपने बिखरते थे। हर बार निराशा होती थी हर बार सपने बिखरते थे।
सिर्फ शक्ल और ज़िस्म से ही खूबसूरत नहीं होती, वो एक सुंदर मन होती हैं, जिसे देखने के सिर्फ शक्ल और ज़िस्म से ही खूबसूरत नहीं होती, वो एक सुंदर मन होती हैं, ज...
रिश्ते तन्हा पड़े हुए हैं रिश्ते कमाइए मेरे घर से दूर यूँ ना जाइए रिश्ते तन्हा पड़े हुए हैं रिश्ते कमाइए मेरे घर से दूर यूँ ना जाइए
जिंदगी में किसको,कौन यहां पर अपना मिला है. जिंदगी में किसको,कौन यहां पर अपना मिला है.
तुम सुंदर हो... या तुम्हारी तस्वीर... तय नहीं कर पा रहा हूं... तुम सुंदर हो... या तुम्हारी तस्वीर... तय नहीं कर पा रहा हूं...
चाहे कितने भी हो काँटे इनके जीवन में ! चाहे कितने भी हो काँटे इनके जीवन में !
विज्ञान वरदान है या अभिशाप ये कैसे तय करेंगे आप। विज्ञान वरदान है या अभिशाप ये कैसे तय करेंगे आप।
जिधर देखो उधर दिखते हैं, कटे हुए हाथ कहीं दवा की कालाबाज़ारी करते हुए। जिधर देखो उधर दिखते हैं, कटे हुए हाथ कहीं दवा की कालाबाज़ारी करते हुए।
बंद पिंजरे में जब ,वो पंछी फड़फड़ाता , सचमुच उसे देख हर बच्चा ,जोर से ताली बजाता। बंद पिंजरे में जब ,वो पंछी फड़फड़ाता , सचमुच उसे देख हर बच्चा ,जोर से ताली बजात...
ख्वाबों को चलना ना आया ,तेरे संग बिखरना ना आया! ख्वाबों को चलना ना आया ,तेरे संग बिखरना ना आया!
दूर हुआ जीवन से विज्ञान तकनीकी विचारधारा का टेंशन। दूर हुआ जीवन से विज्ञान तकनीकी विचारधारा का टेंशन।
आजादी अलख जगा, सीने में भी आग लगा शमशीर उठा लिया, श्रद्धा दिखलाइये। आजादी अलख जगा, सीने में भी आग लगा शमशीर उठा लिया, श्रद्धा दिखलाइये।
अब सफेद ख्वाब जो भी आते, वही वैधव्य का जीवन बिताते। अब सफेद ख्वाब जो भी आते, वही वैधव्य का जीवन बिताते।
वह बड़ा मूर्ख जो इसे स्वयं की ज़िद पर केवल जीता है ! वह बड़ा मूर्ख जो इसे स्वयं की ज़िद पर केवल जीता है !
तेरे संग गुजरे उन लम्हों की याद दिलाता है। तेरे संग गुजरे उन लम्हों की याद दिलाता है।
जब मिलता है साथ मेहनत का ये भी बहुत जरूरी है..!! जब मिलता है साथ मेहनत का ये भी बहुत जरूरी है..!!
अपने साथ लड़ रहे इंसान को मकसद से, स्वतंत्र कर जाती हैं....... जब मौत आती है। अपने साथ लड़ रहे इंसान को मकसद से, स्वतंत्र कर जाती हैं....... जब मौत आती है।
जो होगा देखा जायेगा...! हाँ... यह हादसों का शहर है...! जो होगा देखा जायेगा...! हाँ... यह हादसों का शहर है...!
मजहब की लेकर के आड़़ इन्सानियत का कर देते हैं खून। मजहब की लेकर के आड़़ इन्सानियत का कर देते हैं खून।
शायद ईश्वर की सियाही ना बची होगी, चलो यही सोच कर अपने दिल को तसल्ली तो होगी।। शायद ईश्वर की सियाही ना बची होगी, चलो यही सोच कर अपने दिल को तसल्ली तो होगी।।