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Chandramohan Kisku

Abstract

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Chandramohan Kisku

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गाँव-देहात

गाँव-देहात

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गाँव केवल 

एक शब्दमात्र नहीं है 

भींगी मिट्टी की 

सोंधी खुशबू भी है 

खेत में, खलिहान में 

नदी में, मैदानों में 


हिलती सरसों फूल की 

पिली रंग भी लगी है

गोधूलि में गायों की चुहुल 

उड़ती धूल के साथ गले की 

घंटी की मधुर आवाज़,


किसां की कंधे में 

खेतों की हरियाी 

साग भी है

पूर्णिमा की स्निग्ध प्रकाश में 

गाँव के घर - दुवार चमकता है 

और अमावस्या की काली अँधेरी में 

भूतों की नाच और चिल्लाहटें

सुनाई देती है।


वह सुनकर छोटा कुनू

ठण्डी रात में ,माँ की आँचल से छुपकर 

सपने में आसमान में उड़ रहे है 

और प्यारी बेटी मिरु

भुट्टे की भुंजिया खाती हुई 

अपनी दादाजी से 

तुरता सियार की कहानी सुन रही है।


गाँव केवल 

शब्दमात्र नहीं है 

कोयल की गीत,

पंक्षियों के कलरव 

मुर्गे की बाँघ

सभी तुम्हे गाँव में मिलेंगे 

भाभियों से मजाक 

दादा-दादियों से हँसी


माँ की शिक्षा,

बाबा का समझाना 

भाई का प्यार,

छोटी बहन का मुँह फुलाना

सभी गाँव - घर में ही मिलेंगे।


गाँव केवल 

शब्दमात्र नहीं है 

सपने की स्वर्ग है 

यहाँ की शाम में 

बहुत सुख मिलता है 

'गुतियों' के बाँसुरी की तान


' काड़मियों' की गीत

और वृद्धजनों के किस्सागो 

यही सुन पाओगे .

अब दिन बदल रहा है 

गाँवों में भी 

पक्की सड़क घुस रही है 


नगर- बाज़ार से 

गाँव- देहात भी 

गाँव- देहात में रह नहीं पा रहा 

नगर- बाज़ार की रंग से 

रंग रहे हैं 

अपनी पहचान खो रहे हैं।


* गुति=संताली शब्द है जिसका

अर्थ नौकर होता है 

* काड़मी= एक संताली शब्द जिसका

अर्थ नौकरानी होता है।


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