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Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

Abstract

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Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

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गांव और ग्रामीण

गांव और ग्रामीण

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एक जमाना गांवों का

ज्यादा होते थे किसान,

खेत में करते थे सेवा

होते थे देश की शान।


ग्राम्य जीवन सुंदर था

चला करती बैलगाड़ी

बैलों से हल चलते थे

सवारी में घुड़मचगाड़ी,


जनहितैषी प्यारी भाषा

सहयोग पूर्ण रवैया था

टीवी, फोन नहीं होते थे

गांव-गांव में गवैया था,


हट्टे कट्टे गबरू होते

घी,दूध, दही का खाना

रोटी सिर रख ले जाती

शाम ढले लौटके आना,


घी, शक्कर हाली खाते थे

मेहनत करते थे दिनरात

पूरा परिवार करे लावणी

बँटाते एक दूजे का हाथ,


लुप्तप्राय हुई है बैलगाड़ी

निभाती थी किसान साथ

लौटकर आएगा फिर युग

यादव कहता सुन लो बात,


भोलेभाले होते हैं ग्रामीण

मन में नहीं हो कोई पाप,

जब तक हित नहीं करते

आएगा नहीं उनको धाप।


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