Suvaiba Zaheen
Drama Romance Classics
महबूब का ख़त ए हाजत क़ासिद लाया
पढ़ता है “ खर्च हो गया
वो दिल जो तुमने था रखवाया"
मशियत ए जज़्बातों का बोहरान बताया
उनकी तंग हालि पर मुझे बेहद तरस आया
फ़ौरन ही मैंने लिफ़ाफा ए फुरकत में
पैग़ाम ए आज़ादी भिजवाया !
सावन
Furqat !
प्यारे बाबा !
रास्ते कुछ इस तरह से चल रहे थे कि मैं रोक नहीं पाया। रास्ते कुछ इस तरह से चल रहे थे कि मैं रोक नहीं पाया।
ऐसे आलम में भी उनके हो गये हम, कल यूँ ही हँसते-हँसते रो गये हम ! ऐसे आलम में भी उनके हो गये हम, कल यूँ ही हँसते-हँसते रो गये हम !
मुझ में तेरी धड़कन जब तक धड़केगी एक दूजे से वजूद हमारा कायम रहेगा। मुझ में तेरी धड़कन जब तक धड़केगी एक दूजे से वजूद हमारा कायम रहेगा।
मेरा मुकमल होता है जब सजदों मैं सर मेरा झुका होता है। मेरा मुकमल होता है जब सजदों मैं सर मेरा झुका होता है।
केवल वहीं है उजियारा -प्रकाश -राह वहां नहीं है दिया तले अँधेरा ...! केवल वहीं है उजियारा -प्रकाश -राह वहां नहीं है दिया तले अँधेरा ...!
बात बनी नहीं भोहें तनी खुली, तनी खुली और फिर तन गई। बात बनी नहीं भोहें तनी खुली, तनी खुली और फिर तन गई।
माँगा था जो मैंने वही मिल गया, जिंदगी का जीता हुआ सपना मिल गया। माँगा था जो मैंने वही मिल गया, जिंदगी का जीता हुआ सपना मिल गया।
जून में फ़िल्म कलाकार को खो कर अपने आप को सांत्वना दी थी हमने, जून में फ़िल्म कलाकार को खो कर अपने आप को सांत्वना दी थी हमने,
कुछ ख्वाहिशों को ओढ़ कर कफन में मैं चली हाँ तेरी गली से रुखसत होकर मैं चली कुछ ख्वाहिशों को ओढ़ कर कफन में मैं चली हाँ तेरी गली से रुखसत होकर मैं चली
मेरे जिस्म से रूह तक, उसका ही साया था.... मेरी शर्मीली और मैं उसका सरमाया था.... मेरे जिस्म से रूह तक, उसका ही साया था.... मेरी शर्मीली और मैं उसका सरमा...
क्या अमीर की ही जेब को, पहचानते हो तुम पसीने से नहीं, अन्न खून दे के है उपजता क्या अमीर की ही जेब को, पहचानते हो तुम पसीने से नहीं, अन्न खून दे के है उपजत...
शायद कुदरत ने हमें, इसीलिए.......! घर में ही होम आइसोलेट किया हैं ! शायद कुदरत ने हमें, इसीलिए.......! घर में ही होम आइसोलेट किया हैं !
जीवन को संग्राम समझ कूटनीतिक चालें चली जा रही हैं। जीवन को संग्राम समझ कूटनीतिक चालें चली जा रही हैं।
फिर भी वह सदियों से अपनी हरकतें बदस्तूर जारी रखे हुए हैं..... फिर भी वह सदियों से अपनी हरकतें बदस्तूर जारी रखे हुए हैं.....
कोई सहारा न मिला तो क्या नए जहाँ को तलाश सको तो चलो कोई सहारा न मिला तो क्या नए जहाँ को तलाश सको तो चलो
ये संसार तुझसे है जिंदगी के हर रंग में तेरा ही तो अक्स है। ये संसार तुझसे है जिंदगी के हर रंग में तेरा ही तो अक्स है।
जो नहीं नसीब में वो हमसे दूर है हैं नहीं यक़ीन नसीब पर मुझे। जो नहीं नसीब में वो हमसे दूर है हैं नहीं यक़ीन नसीब पर मुझे।
जीवन के दरवाजे पर ख़ुशियों की आमद से पहले ग़म दबे पाँव दस्तक दे जाता है। जीवन के दरवाजे पर ख़ुशियों की आमद से पहले ग़म दबे पाँव दस्तक दे जाता है।
आज लिखते लिखते लिख गया हज़ार कविता अतिसंवेदनशील में। आज लिखते लिखते लिख गया हज़ार कविता अतिसंवेदनशील में।
सोचा कि आँखों से बहते हुए अश्क देख हाल वो मेरा इस कदर पूछ लेगा सोचा कि आँखों से बहते हुए अश्क देख हाल वो मेरा इस कदर पूछ लेगा