Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

एकाग्रता

एकाग्रता

1 min 116 1 min 116

हवा चलती है तो हिलती है पत्ती

तुम आई तो हिली मेरी पलकें

और टिक गईं तुम पर। 


तूफान आया बारिश हुई

ओले बरसे, बर्फ गिरी

और भी न जाने क्या-क्या हुआ


लेकिन

मेरी पलकें टिकी हैं

अभी भी तुम पर। 


Rate this content
Log in

More hindi poem from Pawanesh Thakurathi

Similar hindi poem from Romance