STORYMIRROR

Surendra kumar singh

Abstract

3  

Surendra kumar singh

Abstract

एक तुम्हारे होने से

एक तुम्हारे होने से

1 min
227

एक तुम्हारे होने से

क्या क्या हो जाता है

मसलन सूरज निकल आता है

रौशनी बिखर जाती है


हवा झुरकने लगती है

पूरा परिवेश महकने लगता है

फूल खिल जाते हैं

परिंदे चहकने लगते हैं।


एक तुम्हारे होने से

रूठे मान जाते हैं

पतझड़ भी मुस्करा उठता है

चाँद जमीन पर उतर आता है


इंसान इंसान बन जाता है

प्रेम इतराने लगता है

जीवन सरल हो जाता है।


एक तुम्हारे होने से

आग शीतल हो जाते है

कोलाहल शांत में बदल जाता है

भागमभाग की विराम मिल जाता है


सोया हुआ सपना प्रत्यक्ष हो जाता है

पूरी सदी एक पल में सिमट जाती है

और परमात्मा पृथ्वी पर आ जाते है

मनुष्य के हमसफ़र बन जाते हैं

एक तुम्हारे होने से।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract