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Abhishek Singh

Abstract

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Abhishek Singh

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एक स्त्री

एक स्त्री

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वो शक्ति है वो प्रसार है,

इस ब्रम्हाण्ड का विस्तार है।


वो जीवन है वो रूप है,

इस ब्रम्हाण्ड का स्वरूप है।


वो बेटी है वो बहन है,

वो माँ वही संचालन है।


वो पत्नी है वो अनन्त है,

हर स्वरुप में वो जीवंत है।


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