एक रोज़
एक रोज़
एक रोज़ सबेरे-2 मैं था जगा
सर्द सुबह मौसम में ऐसा लगा
चुपके से मेरे गालों को चूमा किसी ने
शायद मुझको मेरा यार लगा
फिर जब होश में आया तो देखा क्या
पापा का था थप्पड़ मेरे गाल पे पड़ा
वो कहते रहे क्या तुझे होश नही
मेरा कुर्ता तूने सत्यानाश किया
कुछ देखभाल के खिड़की से दूर रहाकर
जरा गमले से तू दूर रहा कर
वो कहते गये मैं सुनता गया
शायद अभी भी ख्यालों में था खोया हुआ
एक गमला था जो बचा हुआ
पापा ने पैर पे था दे पटका
मेरी सारी अक्ल ठिकाने आयी
जब घर की मुझसे करवाई सफाई
थी वो मेरी प्यारी पहली सुबह
मुझको जिसमें था बड़ा धक्का लगा
