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Keshav singh Rathour

Tragedy

3  

Keshav singh Rathour

Tragedy

एक दुखियारी

एक दुखियारी

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202

एक दुखियारी सड़क किनारे 

आखिरी सांसें गिन रही है 

लगा कर वो ऑक्सीजन

आखरी सांस तक लड़ रही है

लगाकर जोरदार तमाचा 

सिस्टम की तैयारी को

कोस रही होगी मन ही मन 

अपनी इस गरीबी को।


आखिर क्यों अमीर बेड पर 

गरीब रोड पर नजर आते हैं

सिस्टम की लापरवाही का उदाहरण

क्यों हर बार गरीब ही बन जाते हैं।


एक दुखियारी सड़क किनारे

जीवन के लिए लड़ रही है

पैसे के अभाव में 

तिल-तिल कर मर रही हैं।

   


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