STORYMIRROR

Pawan Jha

Tragedy

3  

Pawan Jha

Tragedy

एक बात

एक बात

1 min
214

पहले वो झोपड़ी जली

अब शहर भी जल गया


उस भयानक आग में

हिमालय भी पिघल गया।


बात जो शुरु हुई

रात तक थी जो चली


शाम तक उस बात का

अस्तित्व ही बदल गया।


हुई थी बस एक रोशनी

चिंगारी कहलायी गयी


इसमें कितना सच है

वो तो पहले-ही-पहल गया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy