Amit Bhatore
Abstract
एक और एक ग्यारह
मिलकर बन सकते हैं
ये नज़रिया है, या सूत्र
जोड़कर देखो तो दो,
घटाकर देखो तो शून्य,
गुणा-भाग में समान,
फिर कैसे हो सकता है
एक और एक ग्यारह !
फ़िल्म
किताब
वक्त
मजदूर ही तो ह...
साथ में मिलकर...
सुंदरता को दे...
तुम नारी ही ह...
ग्रीष्मावकाश
नेह ह्रदय का ...
सच की राह पे ...
कायल कलमकार कलम की कलाम पढ़ते पढ़ते। कायल कलमकार कलम की कलाम पढ़ते पढ़ते।
तकनीक ने किया ढेरों मुमकिन, जीवन में अब हम ख़ुश रहते हैं ! तकनीक ने किया ढेरों मुमकिन, जीवन में अब हम ख़ुश रहते हैं !
लेकिन गलत के बारे में याद रखें हो। लेकिन गलत के बारे में याद रखें हो।
गुण -कर्म- स्वाभाव को परखे, चिंतन करे और श्रेष्ठ व्यक्तित्व अपनाए ! गुण -कर्म- स्वाभाव को परखे, चिंतन करे और श्रेष्ठ व्यक्तित्व अपनाए !
जब वो खुले हो बंद होने पर दोनों लगते हैं। जब वो खुले हो बंद होने पर दोनों लगते हैं।
लेकिन दिलोदिमाग में, जटिलता का घर कर गया। लेकिन दिलोदिमाग में, जटिलता का घर कर गया।
राहू केतु के मंशाओं को ना हम कभी बढ़ने देंगे ! राहू केतु के मंशाओं को ना हम कभी बढ़ने देंगे !
जब से हुआ टेक्नोलॉजी का आविष्कार हमारा जीवन बन गया आरामदायक। जब से हुआ टेक्नोलॉजी का आविष्कार हमारा जीवन बन गया आरामदायक।
मोम का दिल आग दोनों हाथ में लेकर चला है। मोम का दिल आग दोनों हाथ में लेकर चला है।
अपने मन की मानता हूँ मैं दिल की सुनता हूँ। अपने मन की मानता हूँ मैं दिल की सुनता हूँ।
वो बचपन के दिन खूब याद आते हैं, स्नेह और प्यार से भरपूर थे जो आँखों में समा जाते हैं, दोस्तों संग ... वो बचपन के दिन खूब याद आते हैं, स्नेह और प्यार से भरपूर थे जो आँखों में समा जात...
अगर इन्हें हम करते रहेंगे प्रदूषित, तो मच जाएगा हाहाकार। अगर इन्हें हम करते रहेंगे प्रदूषित, तो मच जाएगा हाहाकार।
कितनी, हुई आज नभ में भोर, देख, टूट जाए ना, रिश्तों की ये डोर। कितनी, हुई आज नभ में भोर, देख, टूट जाए ना, रिश्तों की ये डोर।
झूठ, कपट, असत्य को त्यागकर, सद्भावों का गहना पहने ! झूठ, कपट, असत्य को त्यागकर, सद्भावों का गहना पहने !
अब तो काफी आसान हो गया वाह वाह, क्या जमाना आ गया ! अब तो काफी आसान हो गया वाह वाह, क्या जमाना आ गया !
अंत में टैक्नोलॉजी हो इस हद तक, इंसान और कुदरत का रहे प्रभुत्व। अंत में टैक्नोलॉजी हो इस हद तक, इंसान और कुदरत का रहे प्रभुत्व।
रिश्तों को समझो अपने ताकी वह किसी अपने का ना खोए हम। रिश्तों को समझो अपने ताकी वह किसी अपने का ना खोए हम।
शपथ लो प्रयोग छोड़कर, हम सब पेड़ लगाएंगे। शपथ लो प्रयोग छोड़कर, हम सब पेड़ लगाएंगे।
मजबूर है वो, लाचार है वो, अभी शक्ति ने खुद को पहचाना नहीं, कोमल है वो, कमज़ोर नहीं, ये राज़ उसने अभ... मजबूर है वो, लाचार है वो, अभी शक्ति ने खुद को पहचाना नहीं, कोमल है वो, कमज़ोर न...
क्योंकि माँ अपना अस्तित्व खोकर भी सदा मुस्कुराये ! क्योंकि माँ अपना अस्तित्व खोकर भी सदा मुस्कुराये !