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Surendra kumar singh

Abstract

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Surendra kumar singh

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एक अदद सच

एक अदद सच

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झूठ की बारिश में

भींगता हुआ 

एक अदद सच

हम सफर भी है

हम आवाज भी है। 


यूं तो विचारों के मौसम के

दिलचस्प नजारे हैं,

खबर दबायी जा रही है

खबर गढी जा रही है


और दिलचस्प तो ये है

कि दिन में बेचैन‌ से भटकते हैं

और रात में जब आनी होती है नीद तो

सपने चले आते हैं,


सपने भी ऐसे कि

दिन की बेचैनी के सबब

अलविदा हो रहे हैं


और सुबह सा मुस्कराता

कोई चेहरा

आहिस्ता आहिस्ता

करीब आ रहा है।


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