STORYMIRROR

मधुशिल्पी Shilpi Saxena

Abstract

4  

मधुशिल्पी Shilpi Saxena

Abstract

दूर का सफ़र

दूर का सफ़र

1 min
23.2K

दूर का सफ़र है

बड़ी ही अनजान ये डगर है


न संगी न साथी बस दिल मे उदासी

वीरानगी का ये कैसा सफ़र है


न आहट है न साया कोई

मुश्किलों मे मेरी ज़िन्दगी का सफ़र है


तन्हा ही है गुज़रा तन्हा ही बसर है

तन्हाई के आलम का बेरंग सफ़र है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract