SHWETA GUPTA
Abstract
हाथ फैलाए हुए
जब देखा था उसे
चंद सिक्के देकर
खुद को अमीर
समझ लिया था
एहसास हुआ
अपनी गरीबी का
उसकी दुआओं में जब
बरकत देखी
वह कौन?
दो सौ वर्ष
गुल्लक
प्रकृति माँ क...
मैं मोदी हूँ
अभिमन्यु के उ...
गर्मी की छुट्...
मैं सैनिक नही...
क्या यह विकास...
वंदे मातरम्
तमाम शहर है अमन-ओ-चैन की गिरफ़्त में आज उसने अपनी जुल्फ़ों को सँवार रखा है तमाम शहर है अमन-ओ-चैन की गिरफ़्त में आज उसने अपनी जुल्फ़ों को सँवार रखा है
तूफ़ान का तेज़ भी रोक दे ऐसा निर्मल झरने सा है स्वर तेरा तूफ़ान का तेज़ भी रोक दे ऐसा निर्मल झरने सा है स्वर तेरा
क्या ये समाज एक लड़की को इंसान समझ पायेगा ? या यूं ही पुरुष प्रधान समाज चलता रह जाएगा? क्या ये समाज एक लड़की को इंसान समझ पायेगा ? या यूं ही पुरुष प्रधान समाज चलता र...
जीना है मुझे बस इसी के खातिर खैर यह बात भी मंजूर है मुझे जीना है मुझे बस इसी के खातिर खैर यह बात भी मंजूर है मुझे
जब मैं बोल भी नहीं पाता था.. सिर्फ़ मेरे इशारों से मैंने उन्हें हर ख्वाहिश पूरा करते दे जब मैं बोल भी नहीं पाता था.. सिर्फ़ मेरे इशारों से मैंने उन्हें हर ख्वाहिश पूर...
मिट्टी, पानी और चाक से बनाया जाता हूं मेरा इतिहास तो देखो मिट्टी, पानी और चाक से बनाया जाता हूं मेरा इतिहास तो देखो
दूध के साथ दाल का पानी पीता भूख लगे तो रो रो वह आता। दूध के साथ दाल का पानी पीता भूख लगे तो रो रो वह आता।
विस्मृत हुआ दुर्योधन को हों भीमसेन या युधिष्ठिर, विस्मृत हुआ दुर्योधन को हों भीमसेन या युधिष्ठिर,
महफिल फिर जमेगी दोस्तों की जब हम तुम बैठेंगे मिलकर, महफिल फिर जमेगी दोस्तों की जब हम तुम बैठेंगे मिलकर,
प्रभु भेजते नर रूप में गुरु को, जो कहलाते ब्रह्म ज्ञानी।। प्रभु भेजते नर रूप में गुरु को, जो कहलाते ब्रह्म ज्ञानी।।
कविता तुम कहाँ हो. कविता तुम कहाँ हो.
जब तक अश्क को चखा ना तुमने स्वाद भला क्या जानोगे जब तक अश्क को चखा ना तुमने स्वाद भला क्या जानोगे
गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक महसूस किय गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक ...
सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं
तेरा बुत बनू और बंद रहूँ मंदिर के तालों में, तेरा बुत बनू और बंद रहूँ मंदिर के तालों में,
पहने ऐनक और हाथ छड़ी ,छवि बड़ी ही मनमोहक होती थी। पहने ऐनक और हाथ छड़ी ,छवि बड़ी ही मनमोहक होती थी।
एक ऐसा देश जो हमें, प्रकृति की गोद का एहसास कराता, एक ऐसा देश जो हमें, प्रकृति की गोद का एहसास कराता,
स्टेशन जहाँ रेल की सवारी है , जहाँ से गुजरते सैकड़ो मुसाफ़िर हैं। स्टेशन जहाँ रेल की सवारी है , जहाँ से गुजरते सैकड़ो मुसाफ़िर हैं।
सती नहीं, देवी नहीं, गर्व है, हम नारी हैं नारी बन ही रहना है सती नहीं, देवी नहीं, गर्व है, हम नारी हैं नारी बन ही रहना है
ऐसे ही थे द्रोणाचार्य रण कौशल में क्या ख्याति थी, ऐसे ही थे द्रोणाचार्य रण कौशल में क्या ख्याति थी,