STORYMIRROR

SHWETA GUPTA

Abstract

3  

SHWETA GUPTA

Abstract

दुआ

दुआ

1 min
318

हाथ फैलाए हुए

जब देखा था उसे

चंद सिक्के देकर

खुद को अमीर 

समझ लिया था


एहसास हुआ 

अपनी गरीबी का

उसकी दुआओं में जब

बरकत देखी


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract