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Shubhi Shukla

Inspirational

1.0  

Shubhi Shukla

Inspirational

दृढ़ संकल्प

दृढ़ संकल्प

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खड़े रहो तुम अपनी परछाई में,

जिसको सूरज ने बनाया।

जाओ उस राह में तुम,

जिसको तुम्हारे मन ने चाहा।


कहीं न कहीं, कभी न कभी,

होना चाहिए एक दृढ़ संकल्प मन में।

जो कुछ भी हो इरादा किसी का,

होना चाहिए वह मानवता के लिए।


न किसी का मोह, न किसी का लोभ;

देगी तुम्हें कोई उपहार।

वहीं के वहीं पड़े रहोगे,

करके पीड़ा दिन-रात।


एक मयूर तुम्हें मिलेगा,

काली-से-काली रातों में;

वह रश्मि तुम्हें पहुँचा देगी,

ऐसी जगह में-

जो होगी सुखदायक,

जैसे की चाँद में।


पर चाँद तक पहुँचने के

संघर्ष को लाँघना होगा तुम्हें,

तभी तुम्हारा संकल्प हो सकता है

एक दृढ़ संकल्प,

जिससे मिलेगी सफलता तुम्हें।।


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