दर्द
दर्द
अपने ही अपनों को देते है दर्द
दिल में रहने वाले भी बन जाते है बेदर्द
अपने ही अपनों को अक्सर सताते
करते विश्वासघात और बहुत रुलाते
दर्द का है अपनों से रिश्ता पुराना
अपने नहीं देते अक्सर दर्द को भुलाना
जिससे भी रिश्ता सच्चा हमने जोड़ा
दर्द उसी ने देकर रिश्ता हमसे तोड़ा
दर्द देते हैं अक्सर हमारे अपने
दर्द ही तो तोड़ देता है जन्म भर के सपने
दर्द की है बड़ बेदर्द दास्ताँ
दर्द का ही तो है हमसे पुराना वास्ता
दर्द से ही तो दर्द को जाना जाता है
दर्द में ही तो अपनों को पहचाना जाता है
