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Swati Nema

Inspirational

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Swati Nema

Inspirational

दो रोटी

दो रोटी

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दो रोटी को कमाने की खातिर, 

हम भी निकल पड़े हैं जमाने से मुखातिफ 

सफल , रहा हो , हर वो व्यक्ति, 

जो अपनो की खातिर निकला हो, 

जैसे गुजारा उसने किया हो, 

पर घर के बिना, घर चलाया है, 

ईश्वर भी शक्ति देते रहें बस, 

उन्हीं के आसरे तो वो यहां तक चलकर आया है , 

दो रोटी को कमाने की खातिर, 

हम भी निकल पड़े हैं जमाने से मुखातिफ, 

कितना दुःख और दिखाना चाहते, 

जरा धीरे ~ धीरे घाव दुखता है, 

दर्द सहने की तो आदत हो गई, 

पर बेरहमी से इसे दिलाया है,

चार दिन और जी भर जी सकूं, 

बस इतना करम चलाया हैं


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