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Kartik maddhesiya

Romance Others

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Kartik maddhesiya

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दो मुलाकातों का सफर

दो मुलाकातों का सफर

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एक अंजान लड़की थी,

बातें तो रोज़ होती थीं,

मगर मीलों दूर रहती थी।

धीरे-धीरे बाते गहरी हुईं,

पहले प्यार हुआ, फिर इज़हार हुआ।

धीरे-धीरे अंजान से जान हुई।


फिर पहली मुलाकात हुई,

नज़रों ने नज़रों से बात की, मगर

लफ़्ज़ों में एक फ़रियाद की।

फ़रियाद तो ना हुई पूरी,

और हमारी कहानी रह गई अधूरी।

ना कॉल, ना मैसेज,

इनफैक्ट उसने बाय भी नहीं बोला।

चंद मीलों का सफ़र

कई मीलों में बदल दिया।


 लौटी पांच साल बाद।

घर आ रही थी वो कार से।

रात का मौसम था,

धुंध भी छाई हुई थी।

तभी कार के सामने आई

एक अजीब सी चीज़।

बाहर जाकर देखा,

तो तो था एक पागल भिखारी।

पास जाकर देखा तो निकली

उससे पुरानी यारी।


देखते ही उस यार को

सीने से लगा लिया।

सीने से लगाते ही

खामोश दिल बोल पड़ा।

देखकर उसकी आह को

खामोश दिल रो पड़ा।


सामने से आई

एक सहमी सी आवाज़,

"तुम आई , यकीन था मुझ तुम पर।

मगर देर कर दी आने में।

दिल की एक तमन्ना थी

कर दे पूरी मेरी फ़रियाद को

जो उस दिन छोड़ गई थी अधूरी।"


सुनते ही इन बातों को

उसने अपने लबों को उसके लबों से छू लिए।

खामोशी थी फिर भी जारी।

तभी महसूस हुई

एक ठंडी चुभन।

गले पर हाथ रखा,

तो कांप गई उसकी रूह।

सांसें थीं खामोश उसकी दिल ने भी धड़कना 

छोड़ दिया था।


लिपटकर उसकी लाश से

बहुत ज्यादा रोई वो।

पछताकर अपने फैसले पर

हद से ज्यादा रोई वो।

सुबह जब लोगों ने देखा,

तो मिला दोनों का

एक सा हाल।

खामोशी की चादर ने

उसे ऐसा जकड़ा

 के यार सुबह तक

वो भी खामोश हो गई।


दो मुल्क का था ये सफर ,

दो ही मुलाकात में खत्म हुआ ,

प्यार का ये अनोखा सफर 

इतिहास के पन्नों में अमर हुआ।



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