Rachna Thakur
Romance
तुम पूर्णिमा के चाँद सी, मैं अँधेरी रात सा,
तुम सावन के बूंदों सी, मैं बृन्दावन बाग सा,
तुम सीप के मोती सी, मैं सागर मझधार सा,
तुम नदी के धारा सी, मैं शीतल तालाब सा।
चाय !!
शब्द
शायराना अंदाज़
आशिक़ी
दो बिषम
अधूरा इश्क़
कल्पना-कोई और
तू ही मेरा ख्वाब, तू ही मेरी दुहा, मेरी हमसफर हमराह मंजूबाला।। तू ही मेरा ख्वाब, तू ही मेरी दुहा, मेरी हमसफर हमराह मंजूबाला।।
या रब इतना तो करम कर ज़िंदगी भर के लिए उनका साथ दे दे..! या रब इतना तो करम कर ज़िंदगी भर के लिए उनका साथ दे दे..!
मेरे कानों में आपका ही मधुर संगीत मेरे कानों में आपका ही मधुर शोर है मेरे कानों में आपका ही मधुर संगीत मेरे कानों में आपका ही मधुर शोर है
प्रेम है क्या? प्रेम मन में उठती तरंगों का नाम है। प्रेम है क्या? प्रेम मन में उठती तरंगों का नाम है।
तब फागुन में रंग बरसता था और सावन में पानी तब फागुन में रंग बरसता था और सावन में पानी
अब मेरी बातों से तेरी हंसी भी फीकी पड़ने लगी है अब मेरी बातों से तेरी हंसी भी फीकी पड़ने लगी है
हे मेरी खोई सी स्त्रोतस्विनी! उठो। हे मेरी खोई सी स्त्रोतस्विनी! उठो।
हुआ आज एहसास उसके जिंदा होने का कत्ल हुआ जिसका दिल सरेआम सोने का. हुआ आज एहसास उसके जिंदा होने का कत्ल हुआ जिसका दिल सरेआम सोने का.
तितलियों के शहर से छलके हो सुनहरी सारे रंग जैसे दुनिया ही मेरी रंगीन हो गई. तितलियों के शहर से छलके हो सुनहरी सारे रंग जैसे दुनिया ही मेरी रंगीन हो गई.
यादें तुम्हारी सताती है इस कदर, कि तड़प है तुम्हारी, हम जताना भूल गये है। यादें तुम्हारी सताती है इस कदर, कि तड़प है तुम्हारी, हम जताना भूल गये है।
यूँ ज़िन्दगी भर किश्तों में प्यार क्या कीजै जहाँ बंदिशें लगे इज़हार क्या कीजै। यूँ ज़िन्दगी भर किश्तों में प्यार क्या कीजै जहाँ बंदिशें लगे इज़हार क्या कीजै।
कान्हा तेरी प्रीत ही है जीवन आधार रंग भरो बस प्रेम का क्षणभंगुर संसार ।। कान्हा तेरी प्रीत ही है जीवन आधार रंग भरो बस प्रेम का क्षणभंगुर संसार ।।
यही चाहता था दिल मेरा कि छू कर तुझको प्यार करूँ। यही चाहता था दिल मेरा कि छू कर तुझको प्यार करूँ।
सदा रब से दुआ की है, रूठे नहीं दिल। तू ही मेरा ख्वाब है, तू ही मेरी मंजिल। सदा रब से दुआ की है, रूठे नहीं दिल। तू ही मेरा ख्वाब है, तू ही मेरी मंजिल।
काश! मेरी आँखों के आँसू उस की आँखों में होते। काश! मेरी आँखों के आँसू उस की आँखों में होते।
प्यार क्या है …कौन कर सका परिभाषित इसको। प्यार क्या है …कौन कर सका परिभाषित इसको।
चूम लेती है तेरी याद हमें जब गुजरते है यादों के कम्बख्त झोंके। चूम लेती है तेरी याद हमें जब गुजरते है यादों के कम्बख्त झोंके।
इसलिए पिया इस वसंत तू जब घर आना अपने हाथों से एक नथ पहना जाना इसलिए पिया इस वसंत तू जब घर आना अपने हाथों से एक नथ पहना जाना
आखिर एक दिन तुम मुझे मिले लेकिन जैसे वक्त बदला। आखिर एक दिन तुम मुझे मिले लेकिन जैसे वक्त बदला।
तेरे मन से मेरे मन का रिश्ता मुझको लुभाता हैं तेरे मन से मेरे मन का रिश्ता मुझको लुभाता हैं