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Rachna Thakur

Romance

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Rachna Thakur

Romance

दो बिषम

दो बिषम

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तुम पूर्णिमा के चाँद सी, मैं अँधेरी रात सा,

तुम सावन के बूंदों सी, मैं बृन्दावन बाग सा,


तुम सीप के मोती सी, मैं सागर मझधार सा,

तुम नदी के धारा सी, मैं शीतल तालाब सा।


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