दिल
दिल
कहते है दिल के टूटने की
आवाज नहीं होती
क्योंकि दिल कांच का नहीं होता
फिर भी दिल टूटता तो जरूर है
क्योंकि उस वक्त अपनों का साथ जो नहीं होता।
काश दिल कांच का बना होता
शायद इसके टूटने पर आवाज तो होती
इस टूटे दिल की आवाज सुनकर
इसे कोई समेटने तो आता।
दिल ये कितना कमजोर होता है
हर किसी के छोड़े जाने पर रोने लगता है
समझ नहीं पाता कि कौन अपना है और कौन पराया
एक बार टूटने पर भी प्यार करना चाहता है।
ये दिल ही है
जो भावनाओं में बह जाता है
टूटकर बिखरने पर भी
फिर से जुड़ना चाहता है।

