STORYMIRROR

Deepak Sarangi

Abstract

4  

Deepak Sarangi

Abstract

दिल के अरमान

दिल के अरमान

1 min
286

ज़िन्दगी में बहुत सी मौके आते हैं

जब वह बेजुबान रह जाते हैं

दिल में अरमान होठों पे चुप्पी

फिर भी हालत सब बयान करती है


किस कमजोर की है मुझे तलाश

उसके बिना बन ना जाऊँ में एक ज़िंदा लाश


जैसे मिला हूँ उसी ने ही सराहा है

फिर भी क्यों दिल में एक प्यास बाकी है


बारिश कल भी अच्छी

लगती थी आज भी लगती है

फिर भी मेरे मन में एक

अधूरी सी प्यास आज भी है।


जीवन की इस मोड़ पर

कैसी विकट परेशानी आयी है

नहीं किसी दोस्तों से या दुश्मनों से

यह खुद ही खुद से लड़ती है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract